रूस से सस्ता तेल, LPG और गेहूं खरीदेगी अफगान हुकूमत; तालिबान का किसी देश से यह पहला करार | Taliban Russia Deal | Taliban Sign Deal With Russian For Oil, Gas & Wheat

काबुल18 मिनट पहले

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पिछले साल 15 अगस्त को अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्जा करने वाले आतंकी संगठन तालिबान ने पहली बार किसी दूसरे देश से बिजनेस डील की है। तालिबान हुकूमत ने रूस से डिस्काउंट रेट पर ऑयल, LPG और गेहूं खरीदने का करार किया है। तालिबान के कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्टर हाजी नूरद्दीन ने डील की पुष्टि कर दी है।

इस मामले में खास बात यह है कि रूस समेत अब तक किसी देश ने तालिबान हुकूमत को मान्यता नहीं दी है। भारत ने मानवता के आधार पर अफगानिस्तान को 50 हजार टन गेहूं और दवाइयां भेजी हैं।

रूस ने दिया था ऑफर
‘ब्लूमबर्ग’ की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने अफगानिस्तान को कम कीमत पर ऑयल और खासकर डीजल सप्लाई का ऑफर दिया था। बाद में बात आगे बढ़ी और डील में लिक्विड पेट्रोलियम गैस (LPG) के अलावा गेहूं भी शामिल किए गए। अब देखना ये होगा कि तालिबान पेमेंट किस तरह करता है, क्योंकि वो इंटरनेशनल बैंकिंग सिस्टम से बाहर है और अमेरिका ने उसके तमाम एसेट्स फ्रीज कर दिए हैं।

नूरद्दीन ने डील के ऐलान के वक्त कहा- हम अपने ट्रेडिंग पार्टनर्स की तादाद बढ़ाना चाहते हैं। रूस ने हमें सस्ता तेल, गैस और गेहूं खरीदने का ऑफर दिया था। इसलिए यह डील हुई है।

फरवरी में भारत के तत्कालीन विदेश सचिव हर्ष श्रंगला ने अफगानिस्तान के लिए गेहूं और दवाइयों के ट्रक रवाना किए थे।

फरवरी में भारत के तत्कालीन विदेश सचिव हर्ष श्रंगला ने अफगानिस्तान के लिए गेहूं और दवाइयों के ट्रक रवाना किए थे।

पश्चिमी देशों की नाराजगी बढ़ेगी
यूक्रेन पर हमले को लेकर रूस पहले ही अमेरिका और पश्चिमी देशों की आंखों की किरकिरी बना हुआ है। अब तालिबान से उसकी डील को लेकर उनकी नाराजगी बढ़ना तय है।

पश्चिमी देशों की मांग है कि तालिबान ह्यूमन राइट्स के हालात तेजी से सुधारे। इसमें भी सबसे पहले महिलाओं को शिक्षा समेत हर क्षेत्र में बराबरी का हक दिया जाए। इसके बाद ही तालिबान हुकूमत को मान्यता देेने पर विचार किया जा सकता है। इस वक्त काबुल में कुछ देशों की एम्बेसीज जरूर मौजूद हैं, लेकिन इनमें हाईलेवल डिप्लोमैट्स नहीं हैं।

अफगानिस्तान की इकोनॉमी बदहाल

  • 15 अगस्त 2021 को तालिबान ने काबुल पर कब्जे के साथ ही अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद अमेरिका ने अपने यहां मौजूद उसके करीब 9 अरब डॉलर के एसेट्स फ्रीज कर दिए थे। यूरोप और बाकी देशों ने उसे मान्यता देने से इनकार कर दिया था। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के लिए दुनिया से कई बार मदद की गुहार लगाई, लेकिन इसका फायदा नहीं हुआ।
  • अफगानिस्तान में भुखमरी का खतरा पैदा हुआ तो भारत ने 50 हजार टन गेहूं और कई ट्रक दवाइयां वहां भेजीं। पाकिस्तान ने रास्ता नहीं दिया तो यह ईरान के रास्ते अफगानिस्तान तक भेजी गईं। अफगानिस्तान के ट्रेड एंड कॉमर्स मिनिस्टर नूरद्दीन के मुताबिक, रूस से 5 लाख टन एलपीजी और दो लाख टन गेहूं खरीदने की डील हुई है। इसके लिए तालिबान नेताओं की एक टीम दो हफ्ते मॉस्को में रही।

हर साल 3 हजार करोड़ रुपए कमाता है तालिबान
तालिबान अपने हिसाब-किताब का कोई ब्योरा प्रकाशित नहीं करता। उसकी कमाई और संपत्ति का सटीक पता लगाना मुश्किल है। 2016 में फोर्ब्स मैगजीन ने अनुमान लगाया था कि तालिबान का सालाना कारोबार 2,968 करोड़ रुपए है। माना जाता है कि इसमें सबसे ज्यादा पैसा ड्रग्स से आता है। इसके अलावा अवैध हथियार के जरिए भी तालिबान पैसा कमाता है।

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