भूस्खलन में मरने वालों की संख्या 37 पहुंची; 25 की तलाश जारी, बारिश बनी रोड़ा | Manipur Landslide Death count rises to 37, Rescue operations underway in Noney

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गुवाहाटी7 मिनट पहले

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मणिपुर के नोनी जिले में तुपुल रेलवे कंस्ट्रक्शन साइट पर हुई लैंडस्लाइड के बाद घटना स्थल से रविवार को तीन और शव मिले हैं। इसके बाद मरने वालों की संख्या बढ़कर 37 हो गई, जबकि 25 लोगों की तलाशी जारी है। हालांकि शनिवार रात से तुपुल इलाके में हो रही भारी बारिश और भूस्खलन के कारण तलाशी अभियान में परेशानी हो रही है। मलबे के नीचे से निकाले गए शवों में 24 भारतीय सेना की 11 गोरखा बटालियन टेरिटोरियल आर्मी के जवान और 13 नागरिक हैं।

अभी भी खतरा टला नहीं
बुधवार रात को बारिश के बाद तुपुल रेलवे स्टेशन से सटी पहाड़ी टूट कर निर्माणाधीन स्टेशन यार्ड पर गिर गई थी। भूस्खलन के मलबे ने इजेई नदी का रास्ता रोक दिया, जिससे एक तालाब बन गया। इजाई नदी तामेंगलोंग और नोनी जिलों से होकर बहती है। जिला प्रशासन ने आस-पास के ग्रामीणों को सावधानी बरतने और जल्द से जल्द जगह खाली करने की एडवाइजरी जारी की है।फिलहाल, मलबा हटाने का काम चल रहा है ताकि पानी बाहर निकल सके।

भूस्खलन में असम के 7 लोगों की मौत हो गई है। 5 का इलाज चल रहा है। 13 अब भी लापता हैं। यह जानकारी असम के मंत्री पीयूष हजारिका ने शेयर की। वे इस समय नोनी में घटना स्थल पर मौजूद हैं।

लैंडस्लाइड की वजह से इजेई नदी का पानी रुका हुआ है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है।

लैंडस्लाइड की वजह से इजेई नदी का पानी रुका हुआ है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है।

मलबे में जारी रहेगी तलाशी
सेना के प्रवक्ता के मुताबिक टेरिटोरियल आर्मी के 6 लापता जवानों और 19 नागरिकों को खोजने के लिए कोशिशें तब तक जारी रहेंगी जब तक कि आखिरी व्यक्ति नहीं मिल जाता। इस अभियान में सेना, असम राइफल्स, टेरिटोरियल आर्मी, एसडीआरएफ और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) में शामिल हैं। अब तक 13 जवानों और 5 नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया है।
मलबे के नीचे लापता व्यक्तियों को खोजने के लिए वॉल इमेजिंग रडार तकनीक (TWIR) का उपयोग किया जा रहा है। अधिकारी ने कहा कि खोज के लिए स्निफर डॉग की मदद ली जा रही है। पढ़ें पूरी खबर…

सैन्य सम्मान के साथ हुई अंतिम विदाई

प्रवक्ता ने बताया कि टेरिटोरियल आर्मी के सात जवानों के शव रविवार को उनके गृहनगर पश्चिम बंगाल के कोलकाता और बागडोगरा और त्रिपुरा के अगरतला भेजे गए। जवानों के पार्थिव शरीर को भारतीय वायुसेना के दो विमानों और भारतीय सेना के एक हेलीकॉप्टर से उनके घर भेजा गया। इससे पहले जवानों को इंफाल में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। जिरीबाम से इंफाल तक रेल लाइन बिछाई जा रही है। इसी की सुरक्षा के लिए यहां जवानों का कैंप लगाया गया था।​​​​​​​

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