आपराधिक रिकॉर्ड वाले कैंडिडेट्स को चुनाव लड़ने से रोकने वाली याचिका पर मांगा जवाब | Reply sought on petition to prevent candidates with criminal records from contesting elections

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नई दिल्ली7 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार और भारतीय चुनाव आयोग (ECI) को गंभीर मामलों में आरोपी पाए गए लोगों को चुनाव लड़ने से रोकने के निर्देश पर नोटिस जारी किया है। जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस हृषिकेश रॉय की बेंच ने मामले पर लॉ एंड जस्टिस मिनिस्ट्री, होम मिनिस्ट्री और इलेक्शन कमीशन से जवाब मांगा है।

दरअसल, कोर्ट इस मामले में एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है।

याचिका में कहा गया है, केंद्र ने लॉ कमीशन और कोर्ट के पूर्व में दिए गए उस निर्देश पर अब तक कोई एक्शन नहीं लिया है, जिसमें गंभीर अपराध में आरोपित लोगों पर चुनाव लड़ने से रोकने की सिफारिश की गई है।

उन्होंने दावा किया कि विधि आयोग की सिफारिशों और अदालत के पहले के निर्देशों के बावजूद, केंद्र और चुनाव आयोग ने इस संबंध में कोई कदम नहीं उठाया है।

2019 लोक सभा चुनाव जीतने वाले 43% कैंडिडेट्स ने की थी आपराधिक रिकॉर्ड होने की पुष्टि

2019 लोक सभा चुनाव जीतने वाले 43% कैंडिडेट्स ने की थी आपराधिक रिकॉर्ड होने की पुष्टि

गंभीर अपराध वाले सांसदों की बढ़ रही संख्या

याचिका में कहा गया है कि 2019 में लोकसभा चुनाव के जीतने वाले 539 में से 233 (43 प्रतिशत) लोगों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले हाेने की पुष्टि की थी। 2009 के बाद से गंभीर आपराधिक मामलों वाले सांसदों की संख्या में 109 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। एक सांसद ने खुद के खिलाफ 204 आपराधिक मामलों की पुष्टि की है। जिसमें गैर इरादतन हत्या, घरेलू हिंसा, डकैती, आपराधिक धमकी आदि से संबंधित मामले शामिल हैं।

एडवोकेट अश्विनी ने इस बात पर चिंता जताई है कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों का प्रतिशत और उनके जीतने की संभावना पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है, जो भविष्य में खतरनाक साबित हो सकती है।

साल 2018 में एडवोकेट अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका पर SC ने केंद्र और ECI से जवाब मांगा था।

साल 2018 में एडवोकेट अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका पर SC ने केंद्र और ECI से जवाब मांगा था।

2018 में उठी थी कानून बदलने की मांग

साल 2018 में ECI ने सुप्रीम कोर्ट में अपने एक एफिडेविट में कहा था कि राजनीति को अपराध मुक्त बनाने के लिए क़ानून में बदलाव की ज़रूरत है, जो ECI के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। ECI ने केंद्र के सामने पांच वर्ष की सजा के वाले अपराधियों पर आरोप तय होने के बाद उन्हें चुनाव लड़ने से रोकने की बात कही थी, बशर्ते मामला चुनाव से छह महीने पहले दर्ज किया गया हो।

ECI ने अपने एफिडेविट में कमीशन को राजनीतिक दलों का पंजीकरण खत्म करने की शक्ति दिए जाने की बात भी कही थी। कमीशन के अनुसार चुनाव को करप्शन और अपराध मुक्त रखने के लिए उन्हें दलों का पंजीकरण खत्म करने के लिए आवश्यक आदेश देने की शक्ति दी जानी चाहिए।

ECI ने ये एफिडेविट एडवोकेट अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका पर दाखिल किया था। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और चुनाव अयोग को मामले पर गंभीरता से विचार करने और अपना जवाब देने को कहा था। पर अब तक इस पर कोई एक्शन दोनों की ओर से नहीं लिया गया है।

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